देश के सरकारी उपक्रमो का लगातार निजीकरण हो रहा रहा एक तरफ चकाचौंध वाली जिंदगी में लोग इस निजीकरण का समर्थन तो कर रहे है लेकिन भविष्य में इस निजीकरण से होने वाले नुकसानों को अच्छे से समझ नही पा रहे है। निजीकरण का फायदा उच्च वर्ग के परिवारों को तो मिलता है परंतु मध्यमवर्गीय लोगो को कोई विशेष फायदेमंद नही होता। जबकि निजीकरण का ये रूप गरीब तबके के परिवारों की तो कमर तोड़ देता है ।

अरुण शर्मा ने कहा वर्तमान परिवेश में बात की जाए तो देश मे गरीबो की संख्या अचानक से बढ़ने लगी है। और इन परिवारों को सरकार सीधे तौर पर मदद मुहैया करा रही है। ये वो लोग हों जो 2 वक्त के भोजन की व्यवस्था भी नही कर पा रहे है। और सरकारी मदद पर खड़े है। इन्हें खाने के लिए अनाज, यात्रा करने के लिए सरकारी परिवहन जैसे सरकारी बस सेवाएं, सरकारी रेल सेवाएं, शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों और उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों की जरूरत है।

लगातार हो रहे निजीकरण से ये सभी सेवाएं अव्वल दर्जे की बेहतरीन तो हो जाएंगी लेकिन ये सभी सेवाएं गरीब तबके की पहुंच से बाहर हो जाएंगी। आज देश का गरीब इस स्थिति में नही है कि अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में शिक्षा दिला सके, निजी अस्पतालों के खर्च उठा सके और खुद के वाहन से यातायात कर सके।

अरुण शर्मा कहते है कि सरकारी उपक्रमो का जिस तरह से निजीकरण किया जा रहा है उससे गरीबो का जीवन स्तर लगातार नीचे जाता जा रहा है और मध्यमवर्गीय परिवार भी गरीबी रेखा की जद में आने लगे है। किसी भी देश का समुचित विकास तब होता है जब उसके सभी वर्ग समान रूप से आगे बढ़े और प्रगति करें।

दूसरा जब कोई सरकारी उपक्रम निजी हाथों में जाता है तो वह अपनी सेवाओं की कीमत बढा देता है, जो गरीब अपने भोजन के लिए भी सरकार की मदद पर निर्भर है वो इन महंगी निजी सेवाओ का भुगतान करने की स्थिति में नही होते। परिणामस्वरूप वो इन सेवाओं का लाभ ले ही नही पाते। और ऐसी कई सेवाएं इन लोगो की पहुंच से बहुत दूर निकल जाती है।

अरुण शर्मा का मानना है कि मोदी सरकार द्वारा लगातार किये जा रहे निजीकरण से अगर आप खुश है तो आपको एक बार रुककर ये सोचना पड़ेगा कि क्या ये निजीकरण सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में सक्षम है ? क्या निजीकरण का लाभ अंतिम व्यक्ति को हो रहा है ? क्या निजीकरण के बाद गरीबो का जीवनस्तर सुधर रहा है ? अगर इनका जवाब ‘न’ हो तो फिर आपको निजीकरण के लिए अपने विचारों को बदलने की आवश्यकता है।