आज मैं जब लखीसराय से घर आ रहा था तो बस में एक व्यक्ति मिले। किसी कॉलेज में प्रोफेसर थे। कॉलेज और उनका नाम यहां जिक्र नहीं करूंगा। बगल की सीट पर बैठे थे। बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर उनसे करीब एक घंटे बातचीत हुई। मैंने उनसे कहा सर बिहार में सरकारी कॉलेजों की स्थिति तो आप जानते हैं ग्रेजुएशन 3 साल का है तो यहां 5 साल में पूरे किए जाते है। ऐसे में कैसे सुधार होगा।

आजकल बिहार में निजी कॉलेज भी बहुत खुल रहें है शायद इससे सुधार होगा। उन्होंने हँसते हुए सीधे एक लाइन में कहा शिक्षा अब सिर्फ पैसा कमाने का जरिया है बिहार में सुधार सोच कर हंसी आती है। सरकारी कॉलेजों में तो क्लास नहीं होता पेपर लेट से होते हैं ये समझ आता है लेकिन निजी कॉलेजों में पढ़ाने के नाम पर ऐसे ऐसे शिक्षक रख लिए जाते है जो खुद गूगल से पढ़ कर बच्चों को बताते है। उन्होंने बताया कि अगर आप उन शिक्षकों को क्रॉस क्वेश्चन करने लगे तो उनके पसीने छूट जायेंगे।

उन्होंने कई कॉलेजों का उदाहरण दिया। उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछा क्या करते हो, कहां पढ़ाई करते हो। मैंने उन्हें अपने बारे में विस्तार से बताया। पत्रकारिता का छात्र हूं बिहार के ही एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूं। उन्होंने सीधे कहा जिसकी तुम पढ़ाई बिहार में कर रहे हो ना ये समझो अपना भविष्य खराब कर रहे हो यहां. बिहार में इसकी पढ़ाई जीरो बट्टे जीरो है।

उन्होंने मुझसे पूछा कि जहां पढ़ाई कर रहे हो वहां कितने साल से हो रही है इसकी पढ़ाई, मैंने कहा तीन साल से, अभी एक बैच पासआउट भी हुआ है। उन्होंने पूछा जो पासआउट हुए हैं वो आजकल किस टीवी चैनल में काम कर रहें है। मैंने कहा शायद टीवी चैनल में तो एक भी नहीं हैं सभी लोग यूट्यूब चैनल खोलकर काम कर रहें है। उन्होंने कहा जब यूट्यूब पर ही काम करना है तो लाखों रुपया लगाकर पढ़ाई करने से क्या फायदा.. इससे अच्छा तो ओपन से पढ़ लो और यूट्यूब पर काम कर लो। आजकल तो बिना पत्रकारिता की पढ़ाई किए हुए लोग अपना चैनल खोल कर अच्छी कमाई कर रहें है।

उन्होंने बड़ी गहरी बात करते हुए कहा, जब आप लाखों रुपए देकर किसी विशेष क्षेत्र की पढ़ाई कर रहें है तो इसका मतलब है भीड़ से आप अलग है। आपको प्रोफेशनल्स बनना है ना कि भीड़। उन्होंने कुछ रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था सबसे खराब है। इसको खराब करने में सबसे अधिक भूमिका इन्ही लोगों ने निभाया है।

उन्होंने कहा अगर आप किसी विशेष क्षेत्र की पढ़ाई के लिए मोटी रकम चुका रहें है तो कोशिश करे आपको डिग्री का टैग कम से कम बड़े संस्थान का मिले क्योंकि बड़े संस्थान इसलिए बड़े होते है क्योंकि वो क्वालिटी और क्वानटिटी दोनों पर ध्यान देते हैं। अपने नाम को बरकरार रखने के लिए बेहतर करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता को लेकर कहा इसका क्षेत्र आने वाले दिनों में बड़ा होगा लेकिन जिस तरह से मीडिया में छटनी हो रही है याद रखना वैसे लोगों को मार्केट में काम मिलेगा जो प्रोफेशनल्स होंगे या फिर जिनका टैग बड़ा होगा। ऐसे लोग बाजार से बाहर हो जायेंगे जो इन सब चीजों के दायरे में नहीं होंगे।

उन्होंने कहा आप जिस चीज की पढ़ाई कर रहें है यह एक ऐसा क्षेत्र है जो प्रैक्टिकल अनुभव पर टिका होता है जिसे आप टीवी चैनल, रेडियो, कैमरा और अखबार में रहकर सीखते हैं उन्होंने कहा जहां पर भी इसकी पढ़ाई होती है वहां ये सब रहना चाहिए लेकिन मेरे हिसाब से बिहार के किसी भी पत्रकारिता वाले कॉलेज में हो ये सोच कर भी हसीं आती है फिर वो क्या पढ़ाएंगे पत्रकारिता। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि मैं कई ऐसे पत्रकारिता के शिक्षक को जानता हूं जिनको आप टीवी पर बैठा दीजिए तो खुद नहीं बोल पायेंगे वो क्या पढ़ाएंगे। उन्होंने कहा इस क्षेत्र की पढ़ाई में वैसे लोगों को आना चाहिए जो खुद इस क्षेत्र में दस पन्द्रह साल तक काम किए हो ताकि वो अनुभव बता सके। किताब पढ़कर आप इसको नहीं कर पायेंगे।

उन्होंने कहा जैसे मेडिकल की पढ़ाई होती है वैसे ही पत्रकारिता होती है। वहां बिना रोगी का इलाज किए हुए सीख नहीं सकते वैसे ही इसके लिए जिस संस्थान में अपना चैनल, अखबार, रेडियों ना हो वहां से ऐसे छात्रों को जाने से बचना चाहिए। उन्होंने कुछ का उदाहरण भी दिया। मैं उनकी बातों को कभी क्रॉस करता कुछ में हामी भी भरता। उनसे एक घंटे में बहुत कुछ जानने को सीखने को मिला। उनकी उम्र करीब 60 साल की होगी। उन्होंने कहा तुम्हें प्रोफेशनल्स बनना है यूट्यूबर नहीं इसलिए इस बात पर ध्यान दो। तब तक बस मेरे गांव के मोड़ पर पहुंच गई। कंडक्टर कह रहा था उतर जाइए आपका घर आ गया।

सर को मैने शुक्रिया कहते हुए बोला जिंदगी रही तो जरूर मिलेंगे। आपसे बात करके अच्छा लगा आपके इन बातों को अधिक लोगों तक पहुंचाएंगे।