ब्यूरो चीफ : नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी की रिपोर्ट

कोरोना वायरस संकट के बीच रेलवे ने अपनी कार्य क्षमता को बेहतर करने के नाम पर हजारों पद खत्म करने का फैसला किया है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को इसके लिए लक्ष्य भी दे दिया है। लक्ष्य को आधार मानकर उन पदों की पहचान करनी है जिनकी अब जरूरत नहीं रह गई है। एक वर्ष के अंदर यह प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। यदि इस पर अमल हुआ तो सबसे ज्यादा 2,350 पद उत्तर रेलवे में खत्म होंगे। पूरे देश में 13,450 पद खत्म करने का लक्ष्य है।

उधर, रेलवे बोर्ड के इस कदम का कर्मचारी संगठन विरोध कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड का कहना है कि पिछले कुछ वर्षो में तकनीक का प्रयोग बढ़ा है। सभी विभागों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से कई पद अब गैर जरूरी हो गए हैं। इन पदों की पहचान करने की जरूरत है। इसे ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से पदों की समीक्षा होनी चाहिए जिससे कि मानव संसाधन का सदुपयोग हो सके।

वहीं, रेलवे बोर्ड के इस फरमान से रेल कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है। उनका कहना है कि 55 वर्ष की उम्र या 30 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों की कार्यक्षमता की समीक्षा के बाद अब यह फरमान जारी कर दिया गया है। कोरोना काल में रेल कर्मचारी अपना जीवन जोखिम में डालकर दिन रात मेहनत कर रहे हैं। बावजूद इसके अधिकारी कर्मचारी विरोधी फैसले ले रहे हैं।

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन संयुक्त महासचिव बीसी शर्मा ने कहा कि अधिकारी अपनी नौकरी बचाने के लिए छोटे पदों को खत्म करने में लगे हुए हैं। अधिकारी सरकार को गुमराह करने के लिए मजदूरों पर अत्याचार करते हैं। पहले रेलवे में नौ जोन थे जिनकी संख्या बढ़ाकर 16 कर दी गई। जोन बढ़ने से अधिकारियों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन कर्मचारियों की नहीं। पहले रेलवे में 15 लाख कर्मचारी काम करते थे। अब मात्र 12.25 लाख कर्मचारी रह गए हैं। दूसरी ओर अधिकारियों की संख्या में वृद्धि की गई है ।