मानवाधिकार इमरजेंसी सोशल हेल्पलाइन के प्रदेश अध्यक्ष अभिजीत कुमार ने बिहार सरकार पर बिहार के व्यक्तियों का आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया है प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है बिहार में प्रतिदिन सरकार के अपंग व्यवस्था के कारण लोगों की मृत्यु हो रही है लोग बेरोजगार हो गए हैं संपूर्ण भोजन नहीं मिलने के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं पिछले 2 साल से लोग आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं उसके बावजूद सरकार आंख बंद कर मौत का खेल देख रही हैं और व्यवस्था ठीक करने के बजाए टि्वटर टि्वटर खेल रही हैं वहीं दूसरी ओर सरकार अपने मुख्य अंग पुलिस विभाग को पैसा वसूली का टारगेट दे रखी है जिस कारण पुलिस विवश होकर प्रतिदिन मोटरसाइकिल से निकले लोगों का चालान काटने में लगी है जो व्यक्ति पैदल दिखाई पड़ता है उसे पुलिस भान में बिठाकर है नजदीकी थाना ले जाकर चालान काट रही है जबकि कानून के अनुसार लॉक डाउन का उल्लंघन कर रहे व्यक्तियों पर आपदा अधिनियम की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया जाना है लेकिन ऐसा करने पर सरकार को तत्काल जुर्माना की राशि नहीं मिल पाती है उल्टा सरकारी राशि मुकदमा पंजीकृत एवं मुकदमा संबंधी अन्य कार्यों में खर्च हो जाता है इसलिए पुलिस व्यक्ति को पकड़ राशि वसूल कर छोड़ देती है जो राशि वसूली जाती है वह मास्क के नाम पर ली जाती है जिसका चालान राशि मात्र ₹50 है जो एक व्यक्ति के लिए मामूली सा रकम होता है लेकिन प्रत्येक जिले की बात करें तो ऐसे हजारों लोग का चालान प्रतिदिन होता है इससे अनुमान लगा सकते हैं कि सरकार को प्रतिदिन कितने लाखों का फायदा होता है फिर वही व्यक्ति अगले दिन भी अपने कार्य से निकलता है क्योंकि अब हर व्यक्ति को पता हो गया की सरकार सिर्फ पुलिस को वसूली करने में लगाई हुई है कुल मिलाकर सरकार अपने ही राज्य के लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर करने में लगी है ताकि लोग जिंदा रहने को ही लोकतंत्र समझे और सरकार के इस नेक कार्य में अपना चालान कटाकर अपना योगदान देते रहे