राजनीती और राजनीती करने वाले लोगों की बड़ी अजीब स्तिथि हैं। सरकार के पास मजदूरों के लिए ना पैसा होता हैं सा संसाधन। लेकिन चुनाव में खर्च करना हो, विधायक खरीदने हो. उस समय इनके पास पैसे आ जाते हैं.

विधायक खरीदने के लिए पैसा था. विधायकों को लक्जरी बसों में लेकर भागने के लिए पैसा था. रैली के लिए पैसा था. चार्टर प्लेन से उड़ने के लिए पैसा था.

बस मजदूरों की जान बचाने के लिए पैसा नहीं है. भूख से मर रहे लोगों को बचाने के लिए पैसा नहीं है. 85 प्रतिशत बनाम 15 प्रतिशत का फर्जी फॉमूर्ला डिस्कस होता रहा. जिन्हें घर पहुंचना था, वे पहुंच गए. बहुत से लोग अब भी पहुंच रहे हैं.

यही हालत बिहार सरकार की हैं. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशिल मोदी 30 अप्रैल 2020 को कहते है बिहार से बाहर फंसे फंसे बिहारी मजदूरों को वापस लाने के लिए
बिहार सरकार के पास इतने संसाधन नहीं हैं.

जबकि बीजेपी बिहार में चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी हैं अमित शाह डिजिटल रैली के माध्यम से चुनावी अभियान शुरू कर दिया हैं बीजेपी ने देश में पहली बार आयोजित हो रही इस डिजिटल रैली को वास्तविक लुक देने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है और कोशिश ये है कि बूथ लेवल से लेकर राज्य लेवल तक के नेता को इससे जोड़ा जा सके.

वही बताया जा रहा है की इस रैली के लिए BJP ने बिहार के 72 हजार बूथों पर 72 हजार एलईडी स्क्रीन लगाये हैं. इन एलईडी स्क्रीन पर वे लोग केंद्रीय गृह मंत्री को सुनेंगे जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है.

वही बताया जा रहा हैं की एक 10 x 12 led स्क्रीन का किराया ओसतन 20,000 रूपये होगा यानि 72000 X 20000 यानि सीधा सीधा खर्च 144 करोड़ रूपये है। इसमें अगर ट्रांस्पोर्टेशन जोड़ दिया जाए तो यह और भी ज्यादा होगा।

अब सवाल लोग यही उठा रहे हैं की जिस सुशील मोदी के पास मजदूरों को लाने के लिए पैसे नहीं थे उनकी पार्टी इतना रुपया कहाँ से लाकर चुनाव प्रचार में खर्च करेगी?

इसको लेकर यूजर सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठाते आये हैं अब कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने एक ट्वीट किया हैं. उन्होंने अपने ट्वीट में पीएम केयर्स फंड का जिक्र करते हुए लिखा ” फंड का जवाब मॉंगने वालों, रैलियों में लगने वाली LED गिनते रहना, जवाब मिल जायेगा”

दरअसल तेजस्वी यादव का दावा हैं की “प्रचार के लिए एक LED स्क्रीन पर औसत ख़र्च 20,000₹. BJP की आज की रैली में 72 हज़ार LED स्क्रीन लगाए गये है मतलब 144 करोड़ सिर्फ़ LED स्क्रीन पर खर्च किए जा रहे है। श्रमिक एक्सप्रेस का किराया 600₹ था वो देने ना सरकार आगे आयी और न ही BJP। इनकी प्राथमिकता गरीब नहीं बल्कि चुनाव है