दीपक राजसुमन की सोशल मीडिया पर राय !

आज का दौर सोशल मीडिया का है। इसको लेकर अक्सर हमारे समाज में हमारे स्कूल में हमारे कॉलेज में डिबेट्स होते है और पूरे डिबेट्स का परिणाम यही सामने आता है की सोशल मीडिया से हमारे समाज को नुक़सान हो रहा है। इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। अभी कुछ दिन पहले की बात है हमारे कॉलेज में Prof. Pramod Pathak सर आए थे जो Department of Management Studies, Indian Institute of Technology (ISM), Dhanbad से है।

उस दिन प्रमोद सर का लेक्चर सुन कर मैं काफी प्रभावित हुआ। लेकिन सोशल मीडिया को लेकर प्रमोद सर ने कहा की इससे आज के बच्चों को दूर रहना चाहिए या इसको आज ही छोड़ देना चाहिए इसका कोई फायदा नहीं। सर के इन बातों पर मैंने सर को सोशल मीडिया के फायदे बताए लेकिन सर उसका कोई ठोस जवाब नहीं दिए सीधे तौर पर नकार दिए की सोशल मीडिया से दूरी जरूरी है।

मुझे सर से जबाव की उम्मीद था की मुझे कुछ ठोस जवाब मिलेगा लेकिन नहीं मिला मायूसी हाथ लगी। दुख हुआ। खैर मेरी राय हमेशा रही है की सोशल मीडिया एक क्रांति है इसका इस्तेमाल सही तौर पर किया जाए एजुकेशन के लिए विचारों को सुनने के लिए, खुद को मोटिवेट करने के लिए बहुत जरूरी है।

अब यहां सोचिए की प्रमोद सर से मैं कभी नहीं मिला था लेकिन उस दिन उनके लेक्चर को सुनकर काफी प्रभावित हुआ अब शायद कभी मिल पाऊंगा या नहीं पता नहीं। लेकिन अब मैं उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को Follow करके मैं हर रोज उनके लेख को पढ़ता हूं। उनके वीडियो को देखता हूं। यानि जिस व्यक्ति से कभी मिलूंगा या नहीं पता नहीं लेकिन उनके विचार को, उनके ज्ञान को सोशल मीडिया के माध्यम से तो हर रोज सुन रहा हूं पढ़ रहा हूं सीख रहा हूं।

ऐसे मैं कई प्रोफेसर/टेक्निकल/डॉक्टर/कॉलेज/बिजनेसमैन के अकाउंट्स को फॉलो करता हूं जिनसे मैं कभी नहीं मिला कभी वहां गया नहीं लेकिन हर रोज उनके विचार को/उनके लेख को सोशल मीडिया के माध्यम से पढ़ता हूं सीखता हूं जानता हूं। समझता हूं वह भी मुफ्त में ये हमारे लिए फायदे है।

इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारे कॉलेज के शिक्षक है जो क्लास में एक- एक घंटे पढ़ाते है सभी के अपने अपने समय है। लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से कभी भी हम उनसे कोई भी सवाल पूछ लेते है और हमारे शिक्षक उस सवाल का जबाव भी देते है यानि क्लास में भी समय मिला और सोशल मीडिया के माध्यम से किए गए हमारे सवाल का जबाव भी। ये सोशल मीडिया का कमाल है।

हां मैं ये मानता हूं की सोशल मीडिया पर अगर हम मस्ती के लिए Hi, Hello, बाबू, सोना के लिए अकाउंट्स बनाएंगे तो इसका परिणाम भी बुरा होगा लेकिन अगर हम इसको यूज कुछ एक्स्ट्रा सीखने के लिए करे तो मेरे हिसाब से बहुत बड़ा क्रांति है। Exmple यूट्यूब, यहां पर बहुत ऐसे चैनल है जो एजुकेशन के संबंध के बनाए गए है उनको फॉलो करके बहुत कुछ सीख सकते है। अब हम वहां मिया खलीफा के पुराने वीडियो को देखेंगे तो मेरे लिए समाज के लिए तो सोशल मीडिया गलत ही होगा।