गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ अमित मिश्रा की फाइल तस्वीर

विश्व रेडियो दिवस पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ अमित मिश्रा की प्रस्तुति।

सासाराम। रेडियो संचार का एक ऐसा सशक्त एवं सरल माध्यम हैं जिसने तकनीकी बाजारीकरण एवं प्रतिस्पर्धा के वाबजूद अपनी विश्वनीयता को समाज और बाजार में बनाये रखा हैं। आज सबकी निगाहें रेडियो की ओर हैं। आज ही के दिन यानि 13 फरवरी को शिक्षा के प्रसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रेखांकित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने रेडियो को अभिव्यक्ति का सुलभ माध्यम माना और 13 फरवरी 2012 को विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाने का प्रारूप प्रारित किया।

वर्तमान में दुनिया की लगभग आधी से अधिक आबादी रेडियो को अपना सूचना और मनोरंजन का साधन मानता है। रेडियो का इतिहास भले ही शदियों पुराना हो लेकिन इसके प्रसारण में हमेशा नवीनता का आभास होता हैं क्योंकि हर जगह इसकी उपलब्धता देखी जा सकती हैं। भारत में रेडियो का महत्व उसी समय आकां गया था जब सूचनाओं के अभाव में कई देश आपस में लड़ रहे थे।

प्रथम विश्व में इसने अपने महत्व से लोगों को परिचित कराया। रूडोल्फ हर्ट्ज ने चुम्बकीय शक्ति को आधार मानकर रेडियो की परिकल्पना को साकार किया। लेकिन रूसी एवं भारतीय वैज्ञानिक पाथोप एवं जगदीश चंद्र बसु ने इसे आमजन तक पहुँचाया।

पूर्व में इसे सूचना प्रसारण के रूप में प्रयोग में लाया गया था परन्तु आज यह सूचना और मनोरंजन दोनों के लिए आसान और विश्वासी साधन के रूप में स्वीकृत है। स्वामी विवेकानंद जी ने भी रूस से भारत को रेडियो के माध्यम से ही पहली बार संबोधित किया था।

यदि भारत की बात करें तो भारत में रेडियो 23 जुलाई1927 से शुरू हुआ। मद्रास, कलकत्ता, दिल्ली, पेशावर, लाहौर, लखनऊ में एक के बाद एक लगातार रेडियो केन्द्र खुलते गए। जिसे बाद में 1936 से आकाशवाणी के नाम से जाना जाने लगा जो अब तक प्रभावी है।

यदि हम कहे कि रेडियो भारत में प्रथम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रूप में अपनाया गया तो यह कोई अतिश्योक्ति नहीं हो सकती। आज रेडियो ने शिक्षा और रोजगार को भी आसान बना दिया है। सामुदायिक रेडियो के विकसित होने से जहाँ एक ओर शिक्षा का विकास करना सरल हुआ वहीं इसे रोजगार के विकल्प के रूप में अपनाया गया।

आज रेडियो जॉकी, रेडियो प्रोग्रामर, रेडियो में समाचार वाचक एवं रेडियो पत्रकारिता युवाओं की पहली पसंद बनती जा रही हैं शायद यही कारण है कि आज समय के साथ रेडियो की विश्वनीयता समाज में बढ़ी है और रेडियो पत्रकारिता के रूप में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।