कहते हैं पत्रकारिता जल्दी में लिखा गया इतिहास है जो जनता के लिए जल्दी में सुचना पहुँचाने का काम करता है। जब भारत में पत्रकारिता की शुरुआत की गयी तो उसके पीछे उद्देश्य था कि जनता को जागरूक करना, उनके अधिकारों को इस माध्यम के जरिये बताना। सरकार की योजना, कार्यक्रम को जनता के बीच पहुँचाने का काम मीडिया करती है। आज़ादी की लड़ाई में मीडिया और पत्रकारों ने मुख्य भूमिका निभाई है लेकिन वर्तमान समय की पत्रकारिता और उसकी निष्पक्षता को देखें तो सवालों के घेरों में दिखाई पड़ती है।

आज सुबह से शाम तक मीडिया चैनलों को खोलकर देख लें तो हिन्दू, मुस्लिम, जाति, धर्म, मंदिर, मस्जिद, पाकिस्तान, अफगानिस्तान के आगे कुछ नहीं दिखाई देता। इसमें मीडिया का जितना बड़ा रोल है उससे अधिक योगदान हम सबों ने भी दिया है, हमलोग भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे मुद्दों को भूल गये है। आखिरी बार कब हमने इन मुद्दों पर वोट किया है यही सवालों के घेरे में है।

असल मुद्दों को जनता के बीच से गायब करने में मीडिया मुख्य भूमिका निभा रही है. ऐसा नहीं है कि ये कोई अनजाने में हो रही है ये जान बूझकर किया जा रहा है लोगों को इस मीडिया के माध्यम से भीड़ बनाने का काम किया जा रहा है। कुछ एक ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल हैं जो निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहें हैं जो मुख्य मुद्दों पर सरकार से सवाल करते हैं उनपर आजकल इनकम टैक्स के छापे पड़ जा रहे हैं. जिसमें मुख्य रूप से हाल ही के दिनों में दैनिक भास्कर, भारत समाचार, न्यूज़ क्लिक, न्यूज़ लाउन्डरी जैसे ऑनलाइन पोर्टल शामिल है जो सत्ता से सवाल करते हैं उसपर इनकम टैक्स के छापे पड़े है।

इन पोर्टलों की पहुंच कम हैं फोलोवर्स कम हैं लेकिन इनके तीखे सवालों से सत्ता डरती है। हमारे देश की पत्रकारिता की नींव ही सत्ता से सवाल करने के लिए रखा गया था ताकि सत्ता के बेतुके कानून और योजनाओं पर मीडिया सवाल कर सके। उनकी आलोचना कर सके ताकि सरकार उस कमियों ठीक करे लेकिन आज ऐसी धारणा बना दी गयी है कि अगर कोई पत्रकार सरकार से सवाल कर दे तो कुछ मीडिया वाले ही उसको देशद्रोही, पाकिस्तानी घोषित कर देंगे।

पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि देश में पत्रकारिता और पत्रकारों की स्थिति सरकार के चरण चाटने वाली हो गयी। सुबह शाम सरकार की भजन, आरती, सरकार के जाप से शुरू और खत्म होती है। उसी को देशभक्ति मान लिया गया है ये इस देश का दुर्भाग्य है।

आज कुछ ऐसे पत्रकार भी है जिनका पहले मैन स्ट्रीम मीडिया में बड़ा नाम था लेकिन सरकार से सवाल करने की वजह से उनकी नौकरी खत्म हो गयी और आज वे अपना पोर्टल चला रहें है जनता की आवाज को सरकार तक पंहुचा रहें है जिसमें अजीत अंजुम, पुण्य प्रसून वाजपई, नवीन कुमार और साक्षी जोशी जैसे बड़े नाम है। ये अच्छी शुरुआत भी कहा जा सकता है अब कोर्पोरेट के नीचे काम नहीं करना होगा क्योंकि जब जब पत्रकारिता की कलम कॉर्पोरेट के हाथों में होगी वो कभी निष्पक्ष नहीं हो सकती।

आज कई महीनों से देश के किसान कृषि बिल के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं लेकिन उनकी कोई खबर मीडिया में नहीं है। देश का युवा सड़कों पर आए दिन परीक्षा और नौकरी के लिए आंदोलन करते दिखाई देते हैं लेकिन उनका आंदोलन मीडिया और टीवी चैनलों में कोई जगह नहीं लेती।

करोड़ो युवा आज बेरोजगार हैं लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं, लेकिन सरकार बस ये कह दे की मदरसा बंद कर रहे हैं तो टीवी में घंटों घंटो डिबेट होने लगता हैं। सरकार कह दे राफेल ला रहे हैं तो मीडिया उस राफेल को लेकर महीनों महीनों तक उसी राफेल से पाकिस्तान चीन को तबाह करते नजर आती है।
आखिर कब तक ऐसे टीवी चैनल अपने सिद्धांतों को ताक पार रख कर पत्रकारिता करेगी और कब तक हमलोग अपने पैसे को खर्च करके ऐसे चैनलों का पालन पोषण करेंगे जिसको हमारे मूल मुद्दों और समस्याओं से दूर दूर तक कोई मतलब नहीं हैं। ये तो वही बात हो गयी हैं कि हम अपने देश को बर्बाद करने के लिए ही अपने पैसे से अपने देश में बम की फैक्टरी खड़ा कर रहे हैं जो एक दिन हमारे देश में ही वो बम फट कर हम सब को तबाह करेगा।

आम लोगों को अब सोचना होगा पिछले कई सालों से आपने हजारो रूपए का खर्च किया है टीवी के लिए, अखबारों के लिए लेकिन उस टीवी और अखबार से आपको मिला क्या ये सोचना होगा। मुझे नहीं लगता इस टीवी और अखबारों से नफरत के सिवा, पाकिस्तान और चीन की पुकार के सिवा इससे अधिक कुछ मिला होगा? जिस पाकिस्तान का कोई अस्तित्व नहीं था आज वही पाकिस्तान को भारत के नागरिक अपना पैसा खर्च करके पूरी दुनिया में मीडिया के माध्यम से प्रमोट कर रहा है।

सरकार आएगी जायेगी देश की एकता भाईचारा जिन्दा रहना चाहिए। आज इस मीडिया ने उस एकता को तोड़ने की भरपूर कोशिश की है। मान लीजिये आपके घर में कोई बड़ी मुसीबत हो गयी और आपका पड़ोसी कोई मुसलमान हो फिर उस समय वही मुस्लिम परिवार आपका मदद करेगा ना या उस समय ये जहर फैलाने वाली मीडिया या ये सरकार मदद करने आएगी? आज जरूरत हैं आपकी अपनी सोच समझ शक्ति बढ़ाने की। ये गोदी जहर मीडिया से बचने की। अगर आज इसपर लगाम नहीं लगाया गया तो आने वाली पीढ़ी आपको कोसेगी,सवाल करेगी, आपके समझ पर सवाल उठाएगी। आपने विरासत में क्या छोड़ा उन लोगों के लिए जो आने वाले दिनों में इस देश को चलाएगी?