मैं हमेशा से उज्जवला योजना को पूंजीपतियों की जेब भरने वाला योजना मानता हूं जिसे केंद्र सरकार बहुत सोच समझ कर बनाया हैं। इस योजना से सत्ताधारी पार्टी को झोली भर भर कर वोट भी मिले और पर्दे के पीछे जाहिर सी बात है नोट भी मिले होंगे। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इसके पीछे कई कारण है। हमारे अपने तर्क है। इस योजना को गहराई से समझने का प्रयास करे तो बहुत बड़ा झोल दिखेगा। आप अपने दिमाग पर जोर डालिए और याद करिए की 2014 से पहले गैस सिलेंडर की क्या स्तिथि थी और वर्तमान समय में क्या स्तिथि है?

जब केंद्र में मनमोहन सरकार यानि यूपीए की सरकार थी उस समय किसी को भी मुफ्त गैस सिलेंडर नहीं मिलता था जिसको नया गैस कनेक्शन चाहिए उनको 5500 रुपए लगाकर अपना कनेक्शन लेना पड़ता था। जिसके बदले ग्राहकों को 2 सिलेंडर, एक चूल्हा, एक पाइप और एक रेगुलेटर मिलता था और साल में करीब करीब एक कार्ड पर 15 गैस सिलेंडर मिलते थे। मुझे अच्छे से याद है उस समय 14.2 किलोग्राम की गैस सिलेंडर की कीमत 420 रुपए के आसपास हुआ करती थी।

आज केंद्र में मोदी सरकार है और सरकार का दावा है की उन्होंने उज्जवला योजना के जरिए 8 करोड़ नए गैस कनेक्शन दिया है यानि 8 करोड़ सिलेंडर। सरकार का तर्क है मुफ्त में गरीबों को दिया गया है लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। मैं कई ऐसे लाभार्थी को जानता हूं जिनको मुफ्त सिलेंडर के नाम पर 12 महीनों तक सब्सिडी ही नही मिला लेकिन उनसे गैस सिलेंडर के पूरे कीमत वसूल किए गए। जो सिलेंडर 420 रुपए की हुआ करती थी इधर मुफ्त सिलेंडर के नाम कर इसकी कीमत बढ़ा कर 720 कर दी गई।

अगर आप मनमोहन सरकार के दौरान मिल रही कीमत के अनुसार से भी जोड़े तो 12 महीने में होता है 420 की दर से 5040 रुपए जबकि मोदी सरकार के दौरान 720 की दर से जोड़े तो 12 महीनों में होता है 8680 रुपए। यानि सब्सिडी के नाम पर मोदी सरकार ने उस सिलेंडर का भी कीमत वसूल कर लिया। 3640 रुपए जितना एक सिलेंडर वाले कनेक्शन की कीमत मनमोहन सरकार वसूल करती थी उतना मोदी सरकार मुफ्त के नाम वसूल भी किया और गैस सिलेंडर की कीमत भी बढ़ा दिया, सब्सिडी खत्म कर दी और आज की तारीख में एक 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 920 रुपए है।

कुल मिलाकर समझिए तो मोदी सरकार ने मुफ्त गैस कनेक्शन के नाम पर आपको वोटबैंक भी बनाया और आपके जेब पर तीन गुना अधिक कीमत वाली गैस सिलेंडर का बोझ भी डाला। इसके करिए अपने उद्योगपति मित्रो के जेब में पैसा भी डाला और उन मित्रों से चुनावी चंदा के नाम कर पैसा भी कमाया होगा। लेकिन लोगों को क्या मिला मुफ्त के नाम पर मंहगा सिलेंडर? इससे अच्छा तो 5500 लगाकर प्राइवेट कनेक्शन ही था जिसके बदले 420 रुपए में सिलेंडर तो मिल जाता था? आज मुफ्त के नाम पर 920 रुपए चुकाने पड़ रहे है।

(ये लेख दीपक राजसुमन के निजी विचार है)