दीपक राजसुमन की फाइल तस्वीर

लोकतंत्र और आंतरिक मामलों पर आज देश में चर्चा जोरों पर हैं पक्ष और विपक्ष के अपने अपने राग हैं लोकतंत्र को लेकर लेकिन मेरा तो पहला सवाल यही हैं की लोकतंत्र कहते किसको हैं. क्योंकि बिना लोकतंत्र को जाने यहाँ लोकतंत्र और आंतरिक मामलों पर बात करना बेमानी होगा।

आज जब हम लोकतंत्र की बात कर रहे हैं तो हमे ध्यान रखना चाहिए लोकतंत्र का अर्थ होता हैं (“जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन”) आज पूरी दुनिया में भारत सीना तान कर कहता हैं हमारा मुल्क दुनिया के सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं. हमारे देश का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान हैं.

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आज लोकतंत्र की बात इसलिए करना जरूरी हो गया की पिछले तीन महीनों से किसान आंदोलन कर रहे हैं अबतक इस आंदोलन में 120 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। बच्चे, बूढ़े, बूढ़ी सभी सर्दी के इस मौसम में अपना घर द्वार छोड़ कर अपनी मांगो को लेकर बीच सड़क पर धरना दे रही हैं तब तो उनकी मांगों को लेकर एक ट्वीट तक नहीं कर पाए अक्षय, सचिन, कंगना और बाकी तमाम वे लोग जिनको आज रिहाना के बोलने पर किसान मुद्दे आंतरिक मामला दिखने लगा।

आज जब किसी दूसरे मुल्क के एक महिला सिंगर ने किसानो के समर्थन में, उनके अभिव्यक्ति की आज़ादी, उनकी नागरिकता के अधिकारों को लेकर ट्वीट कर दिया तो सभी देशभक्तों की नींद खुल गयी? जो अब तक किसानों के मुद्दें पर खामोश थे.

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आज यही लोग लोकतंत्र को अपने घर की सामान समझने लगे? आज इनको किसान के मुद्दें आंतरिक मामला दिखने लगा? इतने दिन से इस मुद्दों पर खामोश क्यों थे? लोकतंत्र हैं आपको भी आज़ादी मिली हैं बोलने की कम से कम एक बार बोलकर लोकतंत्र को ही मजबूत कर देते। अपनी नागरिकता का बोध करवा देते किसने रोका था?

आंतरिक मामला था इसी को देखते हुए सुलझाने के लिए कदम आगे कर लेते। लेकिन ऐसा तो नहीं किये . आज किसी दूसरे मुल्क के नागरिक ने हमारे देश के मुद्दों पर बयान दिया तो हमारा आंतरिक मामला हो गया.

आपको याद है उस समय तो हम बड़ी तालियां बजा रहे थे जब हमारे देश के प्रधानमंत्री अमेरिका जाकर ट्रम्प के लिए हावडी मोदी कर रहे थे अबकी बार ट्रम्प सरकार का नारा लगवा रहे थे क्या वह अमेरीका का आंतरिक मामला नहीं था? उस समय तो हमने खुल तालियां बजायी और कहा देखो पूरी दुनिया में डंका बज रहा हैं आज जब वही अमरीका हमारे लोकतंत्र पर कुछ बोला हैं तो आंतरिक मामला हो गया?

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अफ़्रीकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या भी अमेरिका का आंतरिक मामला था लेकिन भारत के कुछ बुद्धिजीवियों ने इसपर अपनी नाराजगी जाहिर किया और करना भी चाहिए मानवता के नाते। इंसानियत के नाते। क्योंकि लोकतंत्र में अधिकार और मानवता आंतरिक नहीं होता।

अगर किसान मुद्दा आंतरिक हैं तो दूसरे मुल्कों के प्रेस को भारत में पावंदी लगा दीजिये। ना दूसरे मुल्क में खबर छपेगी ना हमारा आंतरिक मामला बाहर जायेगा क्योंकि लोकतंत्र तो आपका कच्छा नहीं है जिसको आप अपने मर्जी और जरूरत के हिसाब से खोलेंगे और पहनेंगे, लोकतंत्र एक खुली किताब हैं जिसे हर कोई पढ़ सकता हैं उसपर अपनी राय रख सकता हैं

(ये लेख दीपक राजसुमन सिंह के निजी विचार है। दीपक पत्रकारिता के छात्र और indiantimetv.com और NationPearl.com के संस्थापक हैं)