मैं शुरू दिन से कह रहा हूं कोरोना वायरस के पीछे किसी ना किसी का बड़ा हाथ है जो पूरी दुनिया पर नियंत्रण चाहता है। कॉरपोरेट की लड़ाई में वो आगे निकलना चाहता है। मेडिसिन की दुनिया में अपने एनजीओ को सबसे आगे ले जाना चाहता है। मैं हमेशा मानता हूं कहीं ना कहीं इस महामारी में बिल गेट्स शामिल है। अगर आप ऐसा नही मानते है तो मेरे तर्कों को आप अपने तर्कों से सबूत के साथ काट कर बताए। स्वागत रहेगा।

3 अप्रैल 2015 को TED नामक एक यूट्यूब चैनल ने बिल गेट्स का एक वीडियो अपलोड की है जिसमे बिल गेट्स ये कहते नजर आते है की आने वाले कुछ साल बाद एक भयंकर महामारी आएगी जिसमे बिल गेट्स ने माना था की इसमें एक करोड़ लोग मारे जाएंगे क्या हम इसके लिए तैयार है। (वीडियो कमेंट्स बॉक्स में) सवाल वही गेट्स को पांच साल पहले कैसे पता था)

नवम्बर 2020 और जनवरी 2021 में बिल गेट्स ने कई दोहराया की अगर दुनिया ये मान कर चल रही है की वायरस का प्रोकॉप खत्म हो गया है तो सचेत रहे कुछ महीनों में ये खतरनाक रूप लेने वाली है। आज अप्रैल महीने और और वायरस खतरनाक मोड़ पर चल रही है। मुझे कोई बताए की बिल गेट्स को कैसे मालूम था की ये होने वाला है?

बिल गेट्स 30 जनवरी 2021 को दुनिया को एक बड़ी चेतावनी देते हुए कहा की कुछ सालों बाद कोरोना से भी 10 गुना ज्यादा घातक होगी भविष्य की महामारी। (न्यूज लिंक कमेंट्स बॉक्स में) यहां भी सवाल वही इनको कैसे पता की कोराेना से भी खतरनाक महामारी आने वाली है?

गेट्स ने अपने एनजीओ “बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन” की स्थापना साल 2000 में किया थे जिसके बाद बिल गेट्स पूरी दुनिया में जा जा कर इस एनजीओ को लेकर राज्य सरकार, केंद्र सरकार से जोड़ा यहां तक की भारत भी अछूता नहीं है। भारत में सबसे अधिक पैसा भी बिहार राज्य को मिलता रहा है। आखिर बिल गेट्स को बिहार में ऐसा क्या दिख रहा है जहां अधिक पैसे लूटा रहे है।

अब समझिए सिलसिलेवार तरीके से पूरी कहानी।

1. डिजिटल आईडी

आज देश भर में वैक्सीन लगवाने वालों को एक डिजिटल सर्टिफिकेट मिलता है क्या आपको पता है ये किस व्यक्ति के दिमागी उपज है। समझिए।।

15 अगस्त को मोदी सरकार ने यह घोषणा किया था कि कोविड वैक्सीन का टीका लगवाने वालों को हर डोज के बाद QR कोड बेस्ड सर्टिफिकेट दिया जाएगा और उनकी यूनीक हेल्थ ID भी डिजिटली जनरेट होगी। साथ ही यह भी घोषणा हुई है कि सरकारी एप्प DigiLocker को भी QR कोड बेस्ड वेक्सीनेशन सर्टिफिकेट को स्टोर करने के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा

अब सबसे बड़ा झोल समझिए जो बात आपको आसानी से समझ नही आएगी कि कोरोना की वेक्सीन तो आप आधार के अलावा अन्य ID दिखाकर लगवा सकते हैं लेकिन यदि आप उसके सर्टिफिकेट को डिजिलॉकर मे स्टोर कर के रखना चाहते हैं तो आधार जरूरी होगा ओर आधार के साथ आपका मोबाइल न. भी जुड़ा हुआ होना चाहिए तभी आपके वेक्सीनेशन के QR कोड सर्टिफिकेट को मान्य किया जाएगा

दरअसल डिजिलॉकर के उपयोग के लिए आधार को जरूरी बनाया गया है आधार नंबर के इस्तेमाल से ही आप अपना डिजिटल लॉकर खोल सकते हैं, ओर साथ ही आपका मोबाइल नंबर आधार के साथ लिन्क होना जरूरी है

अब आते हैं यूनिक हैल्थ ID पर, सरकार ने कल साफ किया है कि कोरोना वेक्सीनेशन के लिए बनाई गई Cowin एप के ज़रिए यूनिक हेल्थ ID generate कर सकते हैं और एक खास जानकारी दे दूं जो आपको कोई भी न्यूज़ चैनल या अखबार नही देगा वो यह है कि केंद्र सरकार ने इस यूनिक हैल्थ ID से जुड़े जुड़े नियम कायदों को 2 जनवरी 2020 को ही नोटिफाई किया है

बिल गेट्स की ओर से प्रस्तुत आईडी-2020 प्रोजेक्ट में GAVI की भागीदारी है जो तीसरी दुनिया के देशों में कोरोना वैक्सीन पुहचाने वाला संगठन बताया जा रहा है इसमे भी दुनिया के हर नागरिक को एक यूनिक आइडेंटिटी नंबर और कार्ड दिए जाने की बात है।

2. वैक्सीन।

भारत मे दो वैक्सीन को सरकार ने इमरजेंसी अप्रूवल दिया है पहली है कोविशील्ड जो बिल गेट्स समर्थित सीरम इंस्टीट्यूट की है ओर दूसरी है कोवेक्सीन जो भारत बायोटेक हैदराबाद ने बनाई है

कोवेक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल भारत मे लगभग 28 हजार लोगों पर चल रहे हैं और कोविशील्ड के भारत मे 2/3 चरण के ट्रायल मात्र 1600 लोगो पर हुए हैं

अच्छा अब एक बार अपने दिमाग पर जोर डालिए ओर बताइये कि सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड के भारत मे ट्रायल हो रहे हैं और फलाने को साइड इफेक्ट नजर आया ऐसी कितनी खबरे आपने पिछले महीने पढ़ी थी ?

पिछले महीने बस एक खबर आई कि चेन्नई में कोविशील्ड के वैक्सीन वॉलंटियर ने अपने शरीर पर वैक्सीन के दुष्प्रभाव के कारण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) से 5 करोड़ रुपए का हर्जाना मांगा है। ओर SII ने वॉलंटियर के उसके सभी आरोपों को खारिज तो किया ही बल्कि इस खबर से उसकी छवि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उल्टे उस वालिंटियर पर 100 करोड़ रुपए का दावा ठोक दिया

अब सिर्फ एक बात का जवाब दीजिए कि उस वालिंटियर का इंटरव्यू आपने कितने न्यूज़ मीडिया चेनलों पर देखा ? उसका नाम क्या था ? जाति क्या थी ? कितने साल का था ? दावे का क्या हुआ ? क्या सीरम इंस्टिट्यूट को डाक्टरों के इंडिपेंडेंट पैनल ने क्लीन चिट दे दी ?

उल्टे सीरम इंस्टिट्यूट के अदार पूनावाला तो इस खबर के बाद सरकार से वेक्सीन के दुष्प्रभाव सामने आने पर वेक्सीन केंडिडेट द्वारा किये जाने वाले मुकदमों से इम्यूनिटी की मांग करने लगे थे ?

कोविशील्ड के ट्रायल के बारे में उसके बाद आपको कोई खबर मिली ? जबकि भारत बायोटेक की वेक्सीन के ट्रायल के बारे में आपको भारत के मीडिया की पचासों लिंक दे सकता हूँ कि इसमें ये सही नही है वो सही नही है

चलिए भारत बायोटेक की वैक्सीन में गड़बड़ी है लेकिन कम से कम वो 28000 भारतीय मूल के लोगो पर ट्रायल तो कर रहा है जबकि सीरम वाले मात्र 1600 लोगो पर ट्रायल कर रहे हैं तब भी उन्हें अनुमति दे दी गयी है और ये ट्रायल कब हुए किन राज्यो में हुए , किन अस्पतालों में हुए इसके बारे में हमे कोई जानकारी तक नही है

भारत बायोटेक की वेक्सीन ओर सीरम इंस्टिट्यूट की वेक्सीन को लेकर भारत के मीडिया में यह दोहरा स्टेंडर्ड क्यो अपनाया जा रहा है ? आखिर कौन व्यक्ति है जो सीरम इंस्टीट्यूट के पीछे ढाल बनकर खड़ा है और उसके विरुद्ध कोई भी खबर पब्लिश नही होने दे रहा है। जबकि उसके ट्रायल भारत बायोटेक के ट्रायल से ज्यादा संदेहास्पद है।

3. जिस वैक्सीन में बिल गेट्स का पैसा उसी को अप्रूवल क्यों?

टाइम मैगजीन में बिल गेट्स स्वीकार किया था की जो तकनीक फाइजर ओर मोडर्ना अपनी वैक्सीन मे इस्तेमाल कर रहीं हैं यानी मेसेंजर आरएनए तकनीक (Mrna) उसके विकास में उनके फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका है, साथ ही वह सीरम इंस्टीट्यूट की एस्ट्राजेन्का कम्पनी द्वारा बनाई गई वैक्सीन में भी बड़े पैमाने पर धन लगा चुके हैं। जिसके बाद उनके मित्र वारेन बफेट भी फाइजर कम्पनी के शेयर खरीदे थे जिन्होंने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में सबसे अधिक चंदा दिया है।

अगर आप ध्यान से देखे तो पूरे विश्व मे इन्ही तीन वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल मिला है, ओर इन तीनो वैक्सीन का बिल गेट्स से सीधा संबंध है अब वह चाहते हैं कि दुनिया की 70 फीसदी आबादी को उनकी बनाई वैक्सीन ठुकवा दी जाए और जैसे नरेंद्र मोदी भारत जैसे बड़े देश मे उनके परम सहयोगी बने हुए वैसे ही अन्य देशों की सरकारें में उनके पिठ्ठू बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। जिनकी मदद से वह अपनी इस योजना को कामयाब बनाने के लिए तत्पर है

ओर सच तो यह है कि WHO उनकी जेब में बैठा हूआ हैं क्योंकि अमेरिका यूरोप कुल मिलाकर WHO को जितना सालाना फंड देते हैं उससे कही ज्यादा बिल गेट्स ओर उससे जुड़े हुए संगठन WHO को फंडिंग कर रहे हैं, इसके चीफ दरअसल बिल गेट्स के पपेट की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

बहुत से लोग पूछेंगे कि आखिर बिल गेट्स को इससे फायदा क्या हो रहा है पिछले एक साल में अगर आप ध्यान से दुनिया के 10 सबसे बड़े पूंजीपतियों की लिस्ट देखेंगे तो आप जान जाएंगे कि आपकी ओर हमारी जेब मे आने वाला पैसा किन लोगों के पास जाकर जमा हो रहा है ये वो लोग हैं जिन्होंने इस कोरोना काल मे इंटरनेट और नयी तकनीक का सबसे बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया है ये है अमेजन के जेफ बेजोस, फ़ेसबुक के जुकरबर्ग गूगल के लैरी पेज जैसे लोग इन पूंजीपतियों में बिल गेट्स भी शामिल हैं।

यह सब अपनी कंपनियों के माध्यम से ओर मीडिया में अपनी फंडिंग ओर होल्डिंग के सहारे से साल भर कोरोना के भय को बढ़ा चढ़ाकर दिखाने में कामयाब रहे हैं और आज भी हो रहे हैं। और सबसे बड़ी बात बिल गेट्स भारतीय फार्मा कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट की पैरवी क्यों का रहा है ये खेल समझिए। जबकि 18 अगस्त 2020 को सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा था की वैक्सीन के लिए उसे सरकार से न तो कोई फंड मिला है और न ही उसके साथ कोई एडवांस परचेजिंग एग्रीमेंट हुआ है. इसका मतलब यह है कि सारा प्रोडक्शन बिल गेट्स की संस्था के लिए किया जा रहा है वो जिसको देना चाहेगा उस को ही पहले वैक्सीन दी जाएगी। अब सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया वैक्सीन उत्पादन के लिए एक अरब डॉलर तक का फंड जुटाने के लिए विदेशी फर्म ब्लैकस्टोन और केकेआर के अलावा अन्य सोशल वेंचर फंड और परोपकारी संगठनों से भी मदद ली गई है।

4. रूस को धमकी, गेट्स का संबंध

अब यहां ध्यान देने की बात है की दुनिया का पहला बैक्सीन रूस ने तैयार किया था जिनसे सीधे तौर पर WHO और बिल गेट्स की वैक्सीन लौबी के औकात दिखाया था। एक देश के लिए अपने नागरिकों की जान बचाना उसके लिए हर संभव प्रयास करना आखिर किसी को दिक्कत क्यों होगी लेकिन रूस की वैक्सीन से WHO को दिक्कत हुआ था। WHO ने रूस को चेतावनी दी थी की ये वैक्सीन ना लगाए। आखिर WHO किसके इशारे पर दुनिया को डरा रहा था और उन उन वैक्सीन को क्यों मान्यता दे रहा था जिसमें बिल गेट्स का सीधा सीधा पैसा लगा हुआ है।

जबकि रूस की वैक्सीन की बात करे तो पूरी तरीके से सुरक्षित था वहां के साइंटिस्ट ने इसपर विस्तार से बताया भी था।

रूस की यह वैक्सीन SARS-CoV-2 टाइप के एडिनोवायरस जो कि एक कॉमन कोल्ड वायरस होता है उसके ऊपर बनाई गई है इसी एडीनो वायरस को लेकर आक्सफोर्ड- एस्ट्राजेन्का की वेक्सीन भी काम कर रही है, जिसके सबसे पहले आने की बात की जा रही थी। यानी मोटे तौर पर दोनों एक ही वायरस पर काम कर रहे है तो यह किस आधार पर कहा जा रहा है कि रूस की वैक्सीन गलत तकनीक से बनाई जा रही है क्योकि आप भी तो वही पैटर्न पर काम कर रहे हो?

रशियन साइंटिस्ट का कहना है कि उनके देश में 20 साल से इस क्षेत्र में अपनी क्षमता और काबिलियत को तेज करने के काम चल रहा है इस बात पर लंबे वक्त से रिसर्च की जा रही है कि वायरस कैसे फैलते हैं। इन्हीं दो दशकों की मेहनत का नतीजा है कि देश को शुरुआत शून्य से नहीं करनी पड़ी और उन्हें वैक्सीन बनाने में एक कदम आगे आकर काम शुरू करने का मौका मिला रूसी वैज्ञानिको का यह भी कहना है कि उनकी वैक्सीन जो सामान्य सर्दी जुखाम पैदा करने वाले adenovirus पर आधारित है। इस वैक्सीन को आर्टिफिशल तरीके से बनाया गया है। यह कोरोना वायरस SARS-CoV-2 में पाए जाने वाले स्ट्रक्चरल प्रोटीन की नकल करती है जिससे शरीर में ठीक वैसा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा होता है जो कोरोना वायरस इन्फेक्शन से पैदा होता है। यानी कि एक तरीके से इंसान का शरीर ठीक उसी तरीके से प्रतिक्रिया देता है जैसी प्रतिक्रिया वह कोरोना वायरस इन्फेक्शन होने पर देता लेकिन इसमें उसे COVID-19 के जानलेवा नतीजे नहीं भुगतने पड़ते हैं।

5. वैक्सीन सप्लाई कैसे होगी।

अब आखिरी सवाल बिल गेट्स और उनका एनजीओ किस तरीके से पूरी दुनिया में अपना वैक्सीन स्प्लाई करेगा और हर एक लोगों को अपनी वैक्सीन लगवाने के लिए मजबूर करेगा। समझिए।

किसी भी हालत में WHO समर्थित कोरोना वैक्सीन जून 2021 के पहले नही आएगी वही डिस्ट्रीब्यूशन प्लान की बात है तो इसमें भारत भी शामिल है लेकिन अभी तक किसी वैक्सीन निर्माता से कोई अलग से डील नही की है

डील ये है कि पहले फेज में हर सदस्य देश को उसकी आबादी के 3 फीसदी लोगों के लिए वैक्सीन की खुराक दी जाएगी यानी भारत की आबादी लगभग 1 अरब 40 करोड़ है तो सबसे पहले सवा चार करोड़ खुराक ही मिलेगी वो भी कब मिलेगी कोई भरोसा नही है फिर धीरे धीरे कर के कुल 20 फीसदी आबादी तक के लिए वैक्सीन की डोज WHO का यह कोवेक्स गठबंधन सप्लाई करेगा यानी WHO भारत के लिए अभी तक सिर्फ 28 करोड़ वेक्सीन डोज देने की बात कर रहा है।

WHO का कहना है कि आबादी के 20 फीसदी लोगों के लिए वैक्सीन सप्लाई करने के बाद भी अगर सप्लाई सीमित रहती है तो फेज-2 प्रोग्राम शुरू किया जाएगा. इसके तहत जिस देश में खतरा अधिक पाया जाएगा, उसे वैक्सीन की अधिक खुराक दी जाएगी।

साफ है कि यह योजना सिर्फ कामचलाऊ ढंग से बनाई गई है बड़े देशो ने इसका पहले ही बहिष्कार कर दिया है रूस चीन अमेरिका कोई इस कोवेक्स प्लान में शामिल नही है, अगर भारत को कम से कम अपनी 60 प्रतिशत आबादी के लिए वेक्सीन चाहिए तो उसे अलग से कोई डील करनी ही होगी। जिसका एक नतीजा जियो, अमेजन, गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट का एक साथ आ जाना है इसका भी सीधा संबंध कोरोना वैक्सीन से है। अगर भरोसा नही है तो मुकेश अंबानी का बयान या समय का सुन ले समझ आ जायेगा।

अब सबसे आखिरी बात इतना सब कुछ होने के बड़ा भी बिल गेट्स को ये चिंता है की लोग इतने कम क्यों मर रहे है। उनके अनुमान से अधिक मौतें होनी चाहिए थी लेकिन कम हुआ है। हमे यहां ये भी ध्यान देना होगा की आप चाहे या ना चाहे आपको हर हाल में वैक्सीन लगवाना पड़ेगा ये कुछ समय बाद सरकार निर्देश भी जारी करेगी ये भी बिल गेट्स के दिमागी उपज है और ये दुनिया की तमाम मुल्कों की सरकार भी करेगी क्योंकि WHO और गेट्स का दबाव सभी सरकारों पर है। ये साल दो साल की बात नही होगी एक बार गेट्स लॉबी का वैक्सीन सक्सेस हो जाए फिर याद रखना दुनिया के हर नागरिक हो हर छह महीने या हर साल इसका टीका लगवाना होगा ये अनिवार्य कर दिया जाएगा और आप कुछ भी नही कर पाएंगे क्योंकि आप कॉरपोरेट के चंगुल में फंस चुके होंगे।